अगर धूमल और नड्डा नहीं तो कौन होगा मुख्यमंत्री पद का दावेदार
इस साल हिमाचल में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं । भाजपा ने जहाँ हरियाणा , उत्तरप्रदेश , महाराष्ट्र के चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी के नाम पर ही चुनाव लदा था । ऐसा ही हिमाचल में दोहराया जा सकता है । सुत्रों के मुताबिक पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता प्रेमकुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। वे जब मुख्यमंत्री थे, तो उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इससे उनकी दावेदारी कमजोर मानी जा रही है। उनकी दावेदारी कमजोर होने का दूसरा बड़ा कारण उनकी उम्र भी है प्रधानमन्त्री पहले ही साफ़ कर चुके हैं 75 वर्ष की आयु से अधिक किसी भी नेता को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा । खबरों की मानें तो संभवत: धूमल को यह अहसास है। इसीलिए वे अपने छोटे बेटे अरुण धूमल को राजनीति में प्रवेश दिलाने के लिए लॉबिंग कर हैं। उनके बड़े बेटे अनुराग ठाकुर पहले ही राजनीति में हैं और हमीरपुर लोकसभा से भाजपा सांसद भी।
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(अगर धूमल और नड्डा नहीं तो कौन होगा मुख्यमंत्री पद का दावेदार ) |
अब ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को हिमाचल में मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाकर चुनावी मिदान में उतरे या नहीं लेकिन यहाँ भी प्रधानमन्त्री नरेंदर मोदी का रोल अहम हो जात है , प्रधानमन्त्री दिल्ली कैबिनेट में किसी तरह के फेर बदल के पक्ष में नहीं हैं ।
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(आरआरएस प्रचारक अजय जम्वाल और भाजपा विधायक जय राम ठाकुर ) |
अब ऐसे में, मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए दो-तीन और नाम सामने आते हैं। मसलन- सतपाल सिंह सत्ती, जयराम ठाकुर और आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) प्रचारक अजय जामवाल।खबर के मुताबिक, सत्ती पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष हैं। उनकी छवि साफ-सुथरी है। उन्हें संगठन का आदमी माना जाता है। लेकिन सती स्वंय ही खुद को मुख्यमंत्री की रेस से बाहर बता चुके हैं अब ऐसे में भाजपा के पास दो नाम बचते हैं जयराम ठाकुर और अजय जमवाल । जयराम ठाकुर राज्य के पूर्व मंत्री हैं। यानी उनके पास सरकार में काम करने का अनुभव है। बताया जाता है कि पार्टी कार्यकर्ता भी उनके पक्ष में हैं। तीसरे दावेदार अजय जमवाल इसलिए अहम हो जाते हैं कि भाजपा ने हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में मुख्यमंत्री का चुनाव करते वक्त आरएसएस प्रचारकों को ही तरजीह दी है।
इसलिए उनकी दावेदारी से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि फिर दोहराते चलें कि अगले मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव के पहले सामने आएगा या बाद में, यह अभी तय नहीं है।लेकिन इस बात के स्पष्ट आसार हैं कि धूमल शायद ही बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी होंगे ।
अगर धूमल और नड्डा नहीं तो कौन होगा मुख्यमंत्री पद का दावेदार
Reviewed by Ankita
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शुक्रवार, जून 09, 2017
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