आज ही के दिन 34 साल पहले भारतीय क्रिकेट टीम पहली बार बनी थी विश्व विजेता
25 जून 1983 का दिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास का कभी ना भूल पाने वाला दिन है। 34 साल पहले इसी दिन भारत ने विश्वकप में ऐतिहासिक लॉर्ड्स में वेस्टइंडीज पर 43 रन से हैरतअंगेज जीत दर्ज कर विश्व कप पर कब्जा जमाया था। आज भारत की पहली विश्व कप जीत 34 साल की हो गई। यह एक ऐसी सफलता थी जिसकी किसी भारतीय क्रिकेट प्रेमी को सपने में भी उम्मीद नहीं थी। तब भारत के टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचना तो दूर उसके केवल एकाध मैच जीतने की ही उम्मीद लगाई जा रही थी। लेकिन कप्तान कपिल के जांबाजों ने वह कारनामा कर दिखाया, जिसने भारतीय क्रिकेट को रातोंरात जमीन से उठाकर आसमानी ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया। इसके साथ ही 25 जून 1983 की तारीख भारतीय खेलों के इतिहास में र्स्वाणक्षरों में अंकित हो गई। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने उम्मीदों के विपरीत हैरत अंगेज प्रदर्शन किया था और ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड तथा वेस्टइंडीज जैसी दिग्गज टीमों को एक के बाद एक धूल चटाते हुए विश्वकप पर कब्जा किया था।
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| (कपिल देव वर्ल्ड कप के साथ ) |
भारत ने जीत से शुरू किया था अभियान
भारत ने 1983 विश्वकप में अपने पहले ही लीग मैच में गत दो बार के चैम्पियन वेस्टइंडीज को 34 रनों से हराकर शानदार शुरुआत की थी। भारत ने इसके बाद जिम्बाब्वे को पांच विकेट से धूल चटाई।
दो जीत के बाद ऑस्ट्रेलिया ने पीटा
लेकिन इन दो जीतों के बाद भारत ऑस्ट्रेलिया से 162 रनों के बड़े अंतर से हार गया। फिर अपने चौथे मैच में भारत को वेस्टइंडीज से 66 रनों से शिकस्त झेलनी पड़ी। इन दो हारों के बाद यह माना-जाने लगा था कि भारत की शुरुआती जीत एक तुक्का थी।
कपिल ने बदल दी धारा
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| (कपिल देव रवि शास्त्री व् अन्य खिलाडी कप उठाये हुए ) |
इसके बाद वह क्षण आया जिसने इस विश्वकप में भारत के भाग्य की धारा को ही बदल दिया। जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत अपने पांच चोटी के बल्लेबाज सिर्फ 17 रन पर गंवा चुका था। ऐसे नाजुक समय में कप्तान कपिल ने छह छक्कों और 16 चौकों की मदद से नाबाद 175 रनों की पारी खेली और भारत ने यह मैच 31 रनों से जीता। इस विश्वकप का एकमात्र दुर्भाग्य यही है कि कपिल की इस महान पारी की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं बन पाई। भारत ने फिर ऑस्ट्रेलिया का 158 रनों से रौंदकर सेमीफाइनल में स्थान बना लिया।
इंग्लैंड की मीडिया को दिया मुंह तोड़ जवाब
सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला मेजबान इंग्लैंड के साथ हुआ। इंग्लिश मीडिया ने सेमीफाइनल से पहले साफ कह दिया था कि इंग्लैंड की टीम भारत को आसानी से रौंद देगी। लेकिन ‘मैन ऑफ द मैच’ मोहिन्दर अमरनाथ के बेहतरीन हरफनमौला खेल से भारत ने इंग्लैंड को छह विकेट से धवस्त कर फाइनल में स्थान बना लिया था। भारत की सफलता से इंग्लैंड के क्रिकेट समीक्षकों की आंखें फटी की फटी रह गई। अब भारत का फाइनल में मुकाबला शक्तिशाली वेस्टइंडीज से था।
फाइनल में वेस्टइंडीज को सिखाया सबक
वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला किया। भारतीय टीम 54.4 ओवरों में सिर्फ 183 रन पर लुढ़क गई। कृष्णामाचारी श्रीकांत ने सर्वाधिक 38, मोहिंदर अमरनाथ ने 26 और संदीप पाटिल ने 27 रन बनाए। वेस्टइंडीज की शक्तिशाली बल्लेबाजी को देखते हुए उनके लिए यह कोई बड़ा लक्ष्य नहीं था। फिर बलविंदर सिंह संधू ने गॉर्डन ग्रीनिज को सिर्फ एक रन पर बोल्ड कर दिया। लेकिन इसके बाद विवियन रिचर्डस ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 33 रन ठोंक ड़ाले। रिचर्ड्स बहुत खतरनाक मूड में थे और लग रहा था कि वे मैच को चंद ओवरों में ही खत्म कर देंगे।
कपिल ने हवा से लपका ‘विश्वकप’
तभी उन्होंने मदन लाल की गेंद पर अचानक मिड विकेट की तरफ एक ऊंचा शॉट खेल दिया, कपिल ने अपने पीछे की तरफ लंबी दौड़ लगाते हुए एक अद्धभुत कैच लपक लिया। रिचर्ड्स का आउट होना था कि वेस्टइंडीज की पारी ताश के पत्तों के महल की तरह ढ़ह गई और जल्द ही उसका स्कोर छह विकेट पर 76 रन हो गया। वेस्टइंडीज की पारी अंततः 52 ओवरों में 140 रनों पर सिमट गई। यह एक अविश्वसनीय प्रदर्शन था, लेकिन जो जांबाज होते हैं भाग्य उन्हीं का साथ देता है और कपिल के जांबाजों ने यही काम कर दिखाया था। मदन लाल ने 31 रन पर तीन विकेट, अमरनाथ ने 12 रन पर तीन विकेट और संधू ने 32 रन पर दो विकेट लेकर लॉयड के धुरंधरों को ध्वस्त कर दिया था। अमरनाथ सेमीफाइनल के बाद फाइनल में भी अपने ऑलराउंड खेल से ‘मैन ऑफ द मैच’ बने। यह एक ऐसा प्रदर्शन था जो आज भी भारतीयों के दिलोदिमाग पर अंकित है।
1983 की विश्व विजेता टीम-
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| (1983 की विश्व विजेता टीम) |
कपिल देव (कप्तान), मोहिंदर अमरनाथ (उप कप्तान), दिलीप वेंगसरकर, सुनील गावस्कर, सय्यैद किरमानी, संदीप पाटिल, कृष्णमाचारी श्रीकांत, यशपाल शर्मा, मदन लाल, रोजर बिन्नी, बलविंदर सिंह संधू, सुनील वाल्सन, रवि शास्त्री, कीर्ति आजाद और संदीप पाटिल।
आज ही के दिन 34 साल पहले भारतीय क्रिकेट टीम पहली बार बनी थी विश्व विजेता
Reviewed by Ankita
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रविवार, जून 25, 2017
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